आ​खिर दून में बने एमडीडीए के फ्लैट पर लोग जाने को क्यू नहीं हो रहे तैयार, जानें कारण

JJTK Desk
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बोले- ‘ये भी फ्लड जोन और रिस्पना नदी किनारे’
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रिस्पना नदी के फ्लड जोन को अतिक्रमण मुक्त करने की तैयारी अब आखिरी चरण में पहुंच गई है। नगर निगम मानसून खत्म होते ही 324 चिह्नित मकानों पर बुलडोजर चलाएगा या फिर अन्य को अलग-अलग फेज में हटाएगा, जो फ्लड जोन में हैं।
इन फ्लड जोन में मौजूद मकानों में रह रहे लोगों को काठ बंगला में बने एमडीडीए के फ्लैट में शिफ्ट किया जाना है, लेकिन लोग इन फ्लैटों में जाने के लिए तैयार नहीं है। क्या कारण है कि लोग इन फ्लैटों में नहीं जाना चाहते हैं? आपको इससे रूबरू करवाते हैं।

रिस्पना नदी पर हो रहा अतिक्रमण
दरअसल, बीते लंबे समय से देहरादून से बहने वाली रिस्पना नदी पर अतिक्रमण होता रहा है। आलम ये है कि नदी अब नाले में बदल गई है। साथ ही किनारों पर मकान आदि निर्माण से नदी का आकर सिकुड़ता जा रहा है। ऐसे में फ्लड जोन में मकान बनाकर वहां रहने वाले लोगों के लिए खतरा बना हुआ है।

324 मकानों को दिया जा चुका नोटिस
वहीं, अब रिस्पना नदी के फ्लड जोन को खाली करने की कवायद एक बार फिर शुरू होने जा रही है। जिसके पहले चरण में काठ बंगला में 324 मकानों को नगर निगम पहले ही नोटिस जारी कर चुका है। मानसून के समाप्त होने के बाद इन पर कार्रवाई की जाएगी।
प्रभावित परिवारों को आवंटित किए गए हैं फ्लैट्स: उधर, फ्लड जोन से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए एमडीडीए यानी मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के फ्लैट आवंटित किए जा रहे हैं, लेकिन इस बीच स्थानीय लोगों का दावा है कि जिन फ्लैटों में उन्हें भेजा जा रहा है, वे भी फ्लड जोन के दायरे में हैं।

क्या बोले स्थानीय लोग?
स्थानीय निवासी चेतराम यादव, सरोज, राखी मित्तल, खुशीराम, रवींद्र कुमार, अक्षत मित्तल, अजय यादव और भगवान दास का कहना है कि ‘यह फ्लैट भी नदी किनारे बनाए गए हैं। अगर नदी का जलस्तर बढ़ जाता है, तो वहां से बचने के लिए रास्ता नहीं है।’
इसके अलावा उन्होंने कहा कि ‘हमने अपनी जमा पूंजी से घर बनाए हैं और परिवार में आने वाले समय सदस्य भी बढ़ेंगे, लेकिन इन फ्लैट में सिर्फ एक ही कमरा है। जिसमें एक परिवार भी नहीं रह सकता है। अगर सरकार को फ्लैट बनाने थे, तो कहीं ओर बनाया चाहिए था। इन फ्लैटों में शिफ्ट होने के बाद भी नदी का खतरा रहेगा।’
रिस्पना नदी किनारे रहे रहे सैकड़ों लोग: बता दें कि देहरादून के काठ बंगला में रिस्पना नदी किनारे सैकड़ों लोग कई सालों से रह रहे हैं। मानसून आने के बाद जब पहाड़ों पर भारी बारिश होती है, तो रिस्पना नदी उफान पर आती है। जिसके कारण आसपास के लोगों का काफी नुकसान होता है और किसी भी तरह की अनहोनी सताती रहती है।

एमडीडीए ने बनाए हैं 324 फ्लैट्स
नगर निगम ने कई साल पहले इस क्षेत्र को फल्ड जोन घोषित किया हुआ है। यहां पर रहने वाले लोगों के लिए काठ बंगला में रिस्पना नदी के पास 324 फ्लैट बनाए हैं। यह फ्लैट वन बीएचके (1BHK) है, जिसमें सिर्फ एक ही कमरा है। जिन लोगों को शिफ्ट करने की कोशिश की जा रही है, उनका परिवार बड़ा है। इसलिए वो शिफ्ट होने से मना कर रहे हैं।
वहीं, देहरादून नगर निगम का कहना है कि पूरी कार्रवाई सिंचाई विभाग के साथ संयुक्त रूप से तय मानकों के अनुसार की जाएगी। पहले चरण में 324 चिह्नित मकानों पर ध्वस्तीकरण होगा। जबकि, इसके बाद फ्लड जोन में आने वाले अन्य निर्माणों की भी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। निगम का दावा है कि अभियान किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि, फ्लड जोन को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए चलाया जा रहा है।
“काठ बंगला में 324 लोगों का चिह्निकरण हो गया था। वहां आवास निर्मित कर लिया गया। जहां बिजली-पानी की व्यवस्था कर दी गई है। लोगों से अनुरोध है कि वो वहां शिफ्ट हो जाएं। शिफ्टिंग की कार्रवाई एमडीडीए को करनी है। अगर यह परियोजना सफल होती है, तो आगे अन्य परियोजनाओं पर भी काम करेंगे।”- आलोक कुमार पांडे, नगर आयुक्त, देहरादून

 

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