
देहरादून: उत्तराखंड की सियासत में जिस फैसले का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था, उस पर आखिरकार मुहर लग गई है। साल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया है। देहरादून स्थित लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में पांच विधायकों को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस विस्तार को न सिर्फ राजनीतिक संतुलन बल्कि चुनावी रणनीति के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।
कौन कौन पांच नए चेहरों धामी कैबिनेट में हुए धामी?
शपथ लेने वाले नए मंत्रियों में खजान दास (राजपुर, देहरादून), राम सिंह कैड़ा (भीमताल), भरत चौधरी (रुद्रप्रयाग), मदन कौशिक (हरिद्वार) और प्रदीप बत्रा (रुड़की) शामिल हैं। सभी को राज्यपाल ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के दौरान सरकार और संगठन के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे और इसे धामी सरकार के ‘नए चरण’ की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
क्यों जरूरी था यह विस्तार?
दरअसल, 2022 में सरकार गठन के समय मुख्यमंत्री समेत कुल नौ मंत्रियों ने शपथ ली थी, जबकि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मंत्रियों की संख्या अधिक हो सकती थी। शुरुआत से ही तीन पद खाली थे। इसके बाद परिवहन मंत्री चंदन रामदास के आकस्मिक निधन से एक और पद रिक्त हो गया। वहीं 2025 में वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के विवादित बयान के बाद इस्तीफे ने कैबिनेट में एक और खाली जगह बना दी। इस तरह कुल पांच पद लंबे समय से खाली चल रहे थे, जिसको लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा था।
लंबे इंतजार के बाद फैसला
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पिछले एक साल से सियासी गलियारों में हलचल तेज थी। कई बार नामों की चर्चाएं सामने आईं, क्षेत्रीय संतुलन और जातीय समीकरणों को लेकर बैठकों का दौर चला, लेकिन हर बार अंतिम फैसला टलता रहा। अब जब राज्य सरकार अपने कार्यकाल के चार साल पूरे करने जा रही है, ठीक उससे पहले यह विस्तार कर दिया गया। माना जा रहा है कि यह कदम सरकार की परफॉर्मेंस और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश
इस विस्तार में साफ तौर पर क्षेत्रीय संतुलन साधने की झलक दिखाई देती है। गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों से प्रतिनिधित्व दिया गया है, वहीं मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। हरिद्वार और रुड़की जैसे मैदानी इलाकों से मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा को शामिल कर पार्टी ने शहरी और व्यापारिक वर्ग को साधने का संकेत दिया है, जबकि भीमताल और रुद्रप्रयाग से प्रतिनिधित्व देकर पर्वतीय क्षेत्रों को भी महत्व दिया गया है। राजपुर से खजान दास को मौका देकर देहरादून क्षेत्र में राजनीतिक संतुलन मजबूत करने की कोशिश मानी जा रही है।
चुनावी नजरिया भी साफ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार पूरी तरह से 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है। संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने, क्षेत्रीय असंतोष को कम करने और नए चेहरों के जरिए ऊर्जा भरने की रणनीति साफ नजर आती है। इसके साथ ही 21 मार्च को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रस्तावित उत्तराखंड दौरे और 23 मार्च को सरकार के चार साल पूरे होने से पहले यह फैसला लेना राजनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है।
आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए मंत्रियों को कौन-कौन से विभाग मिलते हैं। विभागों का बंटवारा सरकार की प्राथमिकताओं और आने वाले समय की रणनीति को स्पष्ट करेगा। साथ ही यह भी देखने वाली बात होगी कि क्या यह नए मंत्री अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन और सरकार की पकड़ को और मजबूत कर पाते हैं या नहीं। फिलहाल इतना जरूर है कि धामी सरकार ने चुनाव से पहले एक बड़ा राजनीतिक दांव चल दिया है, जिसके असर आने वाले समय में साफ तौर पर देखने को मिलेंगे।



