
नई दिल्ली : कृपाल बाग में 37वें अंतर्राष्ट्रीय मानव एकता सम्मेलन के सफलतापूर्वक समापन पर विश्व के प्रसिद्ध धार्मिक नेताओं और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने शांति और मानव एकता की जरूरत पर जोर दिया। सावन कृपाल रूहानी मिशन के प्रमुख संत राजिन्दर सिंह जी महाराज की अध्यक्षता में हुए दो दिन के इस सम्मेलन ने विश्व के जाने-माने आध्यात्मिक नेताओं और विदेशी प्रतिनिधियों को मानव एकता और विश्व शांति पर अपने विचार एक-दूसरे के साथ शेयर के लिए एक सांझा मंच प्रदान किया।
इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत और विदेशों से हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। जिसका आयोजन विश्व धर्म परिषद और मानव एकता सम्मेलन के संस्थापक अध्यक्ष परम संत कृपाल सिंह जी महाराज के 132वें प्रकाश पर्व के मौके पर किया गया, जिन्होंने पहला मानव एकता सम्मेलन फरवरी, 1974 में आयोजित किया था।
एकता को पाने रास्ता है ध्यान-अभ्यास
“ध्यान-अभ्यास-एक खुशहाल जिंदगी की चाबी” विषय पर सेमिनार में अपने मुख्य प्रवचन में
संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने मानव एकता को विश्वभर में कायम करने के लिए ध्यान-अभ्यास करने के महत्व पर जोर दिया।
संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने कहा कि, “इंसान होने के नाते, हमारे बाहरी धर्म, राष्ट्रीयता और विश्वासों में अंतर होने के बावजूद भी हम सब एक हैं। हमारे मनुष्य जीवन का एक ही लक्ष्य है और वो है अपने आपको जानना और पिता-परमेश्वर को पाना। इसी सोच के साथ, परम संत कृपाल सिंह जी महाराज ने फरवरी, 1974 में आयोजित पहले मानव एकता सम्मेलन को एक वैश्विक मंच के तौर पर पूरी दुनिया के सामने पेश किया ताकि लोग एक ही जगह पर मिल-जुलकर बैठ सकें।”
संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने आगे कहा कि, “हमारे बाहरी रूप अलग-अलग होने के बावजूद भी एकता ही है, जो हमें इंसान होने के नाते एक-दूसरे से जोड़ती है। जब हम ध्यान-अभ्यास करते हैं और अपने अंदर पिता-परमेश्वर के दिव्य-प्रेम और रोशनी का अनुभव करते हैं, तो हम यह जान जाते हैं कि प्रभु की वही रोशनी बाकी सभी में मौजूद है, जिससे कि शांति और मानव एकता पूरे विश्वभर में फैलती है।”

‘कृपाल-आध्यात्मिकता के प्रकाश स्तंभ’ विशय पर आयोजित सेमिनार में अपने संदेश में,
संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने परम संत कृपाल सिंह जी महाराज की शिक्षाओं को अपने जीवन में ढालने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि, “परम संत कृपाल सिंह जी महाराज आध्यात्मिकता प्रकाश स्तंभ थे, जिन्होंने लाखों लोगों को जिंदगी के तूफानों और चुनौतियों से निकालकर उन्हें ध्यान-अभ्यास के जरिए पिता-परमेश्वर का अनुभव कराया”
विश्वभर में शांति और मानव एकता को बढ़ावा देने में संत राजिन्दर सिंह जी महाराज के बेमिसाल काम के लिए, सम्मेलन में आए अनेक धर्मगुरुओं ने उन्हें ‘विश्व मानव एकता रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया।
अन्य वक्ताओं का नजरियाः विश्वभर में शांति की स्थापना के लिए ध्यान-अभ्यास करें
37वें अंतर्राष्ट्रीय मानव एकता सम्मेलन में आमंत्रित अन्य वक्ताओं में जगत गुरु विश्वकर्मा शंकराचार्य स्वामी दिलीप योगीराज जी, महंत श्री रवि प्रपन्नाचार्य जी, सैयद फरीद अहमद निजामी साहब, फादर बेंटो रोड्रिग्स, आचार्य येशी फुंटसोक, महामंडलेश्वर स्वामी देवेंद्रानंद गिरी जी, श्री श्री भगवान आचार्य जी, रब्बी इजीकील इसाक मालेकर, श्री विवेक मुनि जी, फादर नॉर्बर्ट हरमन और गोस्वामी सुशील जी शामिल थे।
अंतर्राष्ट्रीय वक्ताओं में जस्टिस डोने (अफ्रीका), कैटालिना गुटिरेज (कोलंबिया), किम मैकक्रिस्टेल (ऑस्ट्रेलिया) और कार्लोस लोजानो (अमरीका) शामिल थे। इन सभी अंतर्राष्ट्रीय वक्ताओं ने इस बात पर अपने विचार शेयर किए कि जब दुनिया में अशांति बढ़ रही है तो ऐसे समय में ध्यान-अभ्यास और आध्यात्मिकता को अपने जीवन में ढालने की ज्यादा जरूरत है। उन्होंने दुनिया भर में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए संत राजिन्दर सिंह जी महाराज की लगातार कोशिशों की भी प्रशंसा की।
37वें अंतर्राष्ट्रीय मानव एकता सम्मेलन के मौके पर सावन कृपाल रूहानी मिशन ने समाज-सेवा के लिए कई गतिविधियाँ आयोजित की गईं।
सम्मेलन के मौके पर 42वां मुफ्त नेत्र जाँच और मोतियाबिन्द ऑपरेशर शिविर लगाया गया, जो 22 फरवरी से 1 मार्च, 2026 तक चला। इस नेक काम को सफल बनाने के लिए, सावन कृपाल रूहानी मिशन ने नोएडा में स्थित आँखों के अस्पताल आई केयर के साथ पार्टनरशिप की, जिसमें इस अस्पताल ने अपने ऑपरेशन थिएटर, मेडिकल उपकरण, डॉक्टर्स और स्टाफ आदि उपलब्ध कराए। इसके अलावा, अमरीका से आए आँखों के डॉक्टर्स ने मरीजों को अपनी सेवा मुफ्त में प्रदान कीं।
पिछले कुछ सालों में समय-समय पर इन मोतियाबिन्द ऑपरेशन शिविरों
का आयोजन कर सावन कृपाल रूहानी मिशन ने 25,000 से ज्यादा भाई-बहनों को नजर वापस दिलाने में मदद की है।
इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान सावन कृपाल रूहानी मिशन ने 21वें वस्त्र वितरण शिविर और 66वें रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया, इसके अलावा दिल्ली कई एनजीओ और अस्पतालों में मरीजों को खाने-पीने की चीजें, फल और दवाएँ भी मुफ्त में वितरण कीं।
तीन दशकों से ज्यादा समय से, संत राजिन्दर सिंह जी उन लोगों को अपना रूहानी मार्गदर्शन दे रहे हैं, जो मानव जीवन का मकसद ढूंढ रहे हैं। पूजनीय महाराज जी को ध्यान-अभ्यास और आध्यात्मिकता के जरिए अंदरूनी और बाहरी शांति को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।



