हरेला पर्व के उल्लास के साथ लोक संवर्धन पर्व के छठे दिन पर्यावरण संरक्षण का संदेश; मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं मंत्रियों ने किया वृक्षारोपण

JJTK Desk
7 Min Read

गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी और लोकगायक किशन महिपाल की सुरमयी प्रस्तुतियों ने हजारों दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

देहरादून : 6वें लोक संवर्धन पर्व के छठे दिन परेड ग्राउंड, देहरादून में उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला का उल्लास, सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश एक साथ देखने को मिला। भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय तथा उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम, उत्तराखंड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस भव्य आयोजन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास तथा देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल भी उपस्थित रहे।

हरेला पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री एवं अन्य अतिथियों ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। हरेला की भावना के अनुरूप आयोजित इस पहल ने प्रकृति संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए नागरिकों से हरित एवं स्वच्छ भविष्य के निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “लोक संवर्धन पर्व में प्रकृति को समर्पित हमारे लोकपर्व हरेला का उत्सव मनाते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह देखकर हर्ष होता है कि यह भव्य आयोजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्पकारों और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को एक ही मंच पर लेकर आया है। मैं इस सफल आयोजन के लिए आयोजकों को हार्दिक बधाई देता हूँ तथा जनता के अभूतपूर्व उत्साह को देखते हुए इसे दो दिन और बढ़ाने के निर्णय की भी सराहना करता हूँ। आज की सांस्कृतिक संध्या में गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी की प्रस्तुति उत्तराखंड की गौरवशाली लोकसंगीत परंपरा को समर्पित एक विशेष श्रद्धांजलि है। हरेला देवभूमि उत्तराखंड की एकता, परंपराओं और प्रकृति के प्रति हमारी आस्था का प्रतीक है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से मैं सभी नागरिकों से आग्रह करता हूँ कि वे स्वयं एक पौधा अवश्य लगाएँ और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। हमारी सरकार ने हरेला के अवसर पर 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था और मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि आज ही 12 लाख से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। दो करोड़ पौधे लगाने के हमारे व्यापक संकल्प के तहत अब तक 1.15 करोड़ से अधिक पौधारोपण किया जा चुका है। उत्तराखंड के विकास के दो मजबूत स्तंभ पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था हैं, इसलिए हमें पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सतत आजीविका को भी सशक्त बनाना होगा। लोक संवर्धन पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ शिल्पकारों और कारीगरों को नई पहचान तथा विकास के अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।”

इस अवसर पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास ने कहा, “मैं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ कि उन्होंने आज हरेला पर्व के इस विशेष अवसर पर हमारे बीच उपस्थित होकर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण कार्यक्रम में सहभागिता की। हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ हमारे अटूट संबंध और पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी का उत्सव है। मैं सभी नागरिकों से आग्रह करता हूँ कि वे कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाएँ और उसकी देखभाल कर हरित एवं स्वस्थ भविष्य के निर्माण में अपना योगदान दें।”

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोकगायक गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी को राज्य की समृद्ध लोकसंगीत परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन एवं लोकप्रिय बनाने में उनके अतुलनीय योगदान के लिए सम्मानित भी किया। यह सम्मान दशकों से उत्तराखंड के लोकसंगीत को जीवंत बनाए रखने तथा अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से नई पीढ़ियों को प्रेरित करने के उनके अमूल्य योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक रहा।

सायंकालीन सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंगीत परंपरा को समर्पित भव्य प्रस्तुतियाँ रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी की मनमोहक प्रस्तुति से हुई। उन्होंने अपने लोकप्रिय गीत ‘नौछमी नरैणा’, ‘ठंडो रे ठंडो’, ‘मेरी गैल्याणी’ सहित अनेक सदाबहार लोकगीत प्रस्तुत कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। उनकी सुरमयी प्रस्तुतियों ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत पर गर्व का भाव और भी प्रबल कर दिया।

इसके बाद उत्तराखंड के लोकप्रिय लोकगायक किशन महिपाल ने अपनी ऊर्जावान प्रस्तुति से पूरे आयोजन में नया उत्साह भर दिया। पारंपरिक लोकधुनों को आधुनिक संगीत के साथ प्रस्तुत करने के लिए प्रसिद्ध किशन महिपाल ने ‘फ्योंलड़िया’, ‘स्याली बिचलिया’, ‘मेरी बामणी’ सहित अपने कई लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति दी। उनके गीतों पर उपस्थित दर्शक झूम उठे और पूरा आयोजन स्थल लोकसंगीत की रंगत में सराबोर हो गया।

दिनभर प्रदर्शनी में भी बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। देशभर से आए शिल्पकारों द्वारा लगाए गए 150 से अधिक हस्तशिल्प, हथकरघा, पारंपरिक कला एवं क्षेत्रीय व्यंजनों के स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने रहे। मास्टर शिल्पकारों द्वारा दी गई लाइव शिल्प प्रदर्शनियों और उनसे प्रत्यक्ष संवाद ने आगंतुकों को भारत की समृद्ध शिल्प परंपरा से रूबरू कराया, वहीं कारीगरों को अपने उत्पादों के विपणन और व्यापार विस्तार का प्रभावी मंच भी उपलब्ध कराया।

लोक संवर्धन पर्व का समापन 17 जुलाई 2026 को एक भव्य संगीत संध्या के साथ होगा, जिसमें ‘धुरंधर’ फिल्म से चर्चित और भारत की लोकप्रिय पंजाबी गायिका जैस्मिन सैंडलस अपनी शानदार प्रस्तुति देंगी। अपनी दमदार आवाज़ और ऊर्जावान मंचीय प्रस्तुति के लिए प्रसिद्ध जैस्मिन सैंडलस ‘धुरंधर – टाइटल ट्रैक’, ‘जाइये सजना’, ‘वारी जावां’, ‘मैं और तू’ तथा ‘आरी आरी’ जैसे लोकप्रिय गीतों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगी। समापन दिवस पर भी पारंपरिक हस्तशिल्प, क्षेत्रीय व्यंजन, लाइव शिल्प प्रदर्शन और विविध सांस्कृतिक गतिविधियाँ आकर्षण का केंद्र रहेंगी तथा इसी के साथ भारत की समृद्ध शिल्प एवं सांस्कृतिक विरासत को समर्पित इस भव्य आयोजन का सफल समापन होगा।

Share This Article
Leave a Comment