- डॉक्टरों ने बताया कि लक्षण प्रकट न होने के कारण पुरुषों की फर्टिलिटी का निदान अक्सर नहीं हो पाता है।
- नोवा आई.वी.एफ फर्टिलिटी, वाराणसी के फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह मामला प्रदर्शित करता है कि भले ही गर्भधारण करने में विकट समस्याएं हों, पर सफलता दिलाने में आई.वी.एफ उपचार बहुत कारगर भूमिका निभाता है।
वाराणसी । नोवा आई.वी.एफ, वाराणसी में एक जटिल मामला तब सामने आया, जब 36 साल के रोहन (बदला हुआ नाम) और 35 साल की स्नेहा (बदला हुआ नाम) आई.वी.एफ ट्रीटमेंट के लिए वहाँ पर पहुँचे। वाराणसी के ये दंपति 7 सालों से अधिक समय से कोशिश करने के बाद भी विफल हो रहे थे। लेकिन नोवा आई.वी.एफ फर्टिलिटी ने इस निराश दंपति को एडवांस्ड आई.वी.एफ की मदद से सफलता दिलाई। इस मामले से प्रदर्शित होता है कि फर्टिलिटी का जाँच और निदान समय पर कराना तथा पुरुषों की इन्फर्टिलिटी के बारे में भी जागरुकता बढ़ाया जाना कितना महत्वपूर्ण है।
कई सालों तक प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की कोशिश करने के बाद भी सफलता न मिलने पर इन दोनों ने नोवा आई.वी.एफ फर्टिलिटी में आकर फर्टिलिटी की विस्तृत जाँच कराई। परीक्षणों में सामने आया कि पति को एजूस्पर्मिया था। इस स्थिति में स्पर्म का उत्पादन काफी कम हो जाता है, इसलिए सीमेन में स्पर्म मौजूद नहीं होते हैं। वहीं पत्नी के अंडों की क्वालिटी व संख्या काफी कम थी। साथ ही, उन्हें डायबिटीज़ और हाईपरटेंशन भी था, जिसके कारण गर्भावस्था का सफर बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया था।
फर्टिलिटी की व्यापक जाँच और काउंसलिंग के बाद इन दोनों ने एडवांस्ड स्पर्म रिट्रीवल प्रक्रिया की मदद से आई.वी.एफ ट्रीटमेंट कराया।
नोवा आई.वी.एफ फर्टिलिटी, वाराणसी में फर्टिलिटी स्पेशियलिस्ट, डॉ. प्रतिभा सिंह ने कहा, ‘‘पुरुषों की इन्फर्टिलिटी आसानी से नजरंदाज इसलिए हो जाती है क्योंकि पुरुषों को इसके कोई लक्षण प्रकट नहीं होते हैं। लेकिन नॉन-ऑब्सट्रक्टिव एजूस्पर्मिया जैसी समस्याओं से फर्टिलिटी पर बहुत बुरा असर पड़ता है। कई मामलों में तो पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन कम हो जाते हैं, उन्हें सैक्स की इच्छा नहीं होती है, और इरेक्टाईल डिस्फंक्शन भी हो सकता है। ये समस्याएं होने के बाद भी पुरुष स्वस्थ ही दिखाई देते हैं। इसलिए समय पर निदान और परामर्श बहुत जरूरी होते हैं।’’
नोवा आई.वी.एफ फर्टिलिटी की क्लिनिकल टीम ने एक सर्जिकल प्रक्रिया, टेसा द्वारा स्पेशियलाईज़्ड स्पर्म रिट्रीवल करके पति की टेस्टीज़ से स्पर्म निकाले। इसके बाद, आई.वी.एफ ट्रीटमेंट किया गया ताकि फर्टिलाईज़ेशन और गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ाया जा सके। इलाज की व्यक्तिगत योजना और सतर्क क्लिनिकल मैनेजमेंट के साथ दंपति ने गर्भधारण करके एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
नोवा आई.वी.एफ फर्टिलिटी, वाराणसी के फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक इन्फर्टिलिटी के हर 10 मामलों में से लगभग 3 में स्पर्म के प्रोडक्शन की समस्याएं होती हैं। नोवा आई.वी.एफ फर्टिलिटी के डॉक्टरों ने यह भी बताया कि खासकर छोटे शहरों में आई.वी.एफ ट्रीटमेंट से जुड़ी मिथकों को दूर किए जाने की जरूरत है क्योंकि यहाँ पर इसे सामाजिक कलंक के रूप में देखा जाता है, जिसकी वजह से इलाज में बहुत देर हो जाती है।
डॉ. प्रतिभा सिंह, फर्टिलिटी स्पेशियलिस्ट, नोवा आई.वी.एफ फर्टिलिटी, वाराणसी ने कहा, ‘‘दंपतियों को एक सबसे बड़ी भ्रांति यह होती है कि आई.वी.एफ का मतलब है डोनर अंडों या डोनर स्पर्म की मदद से गर्भधारण करना। नोवा आई.वी.एफ फर्टिलिटी में ज्यादातर आई.वी.एफ ट्रीटमेंट्स में दंपतियों के अपने अंडों और स्पर्म का उपयोग किया जाता है। समाज में मौजूद भ्रांतियों के कारण लोग मेडिकल इलाज में देर करते चले जाते हैं। ऐसे मामलों में उन्हें सालों तक वैकल्पिक उपाय करने के बाद अंत में फर्टिलिटी स्पेशियलिस्ट के पास ही आना पड़ता है।’’
फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स ने बताया कि इन्फर्टिलिटी महिलाओं और पुरुषों, दोनों को हो सकती है। पर पुरुषों की इन्फर्टिलिटी को नजरंदाज कर दिया जाता है, जिसकी वजह इससे जुड़ा कलंक और जागरुकता की कमी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर एक साल से अधिक समय तक कोशिश करने के बाद भी गर्भधारण नहीं हो पा रहा है, तो दंपतियों को फर्टिलिटी की जाँच करानी चाहिए। अगर पत्नी की उम्र 30 साल से अधिक है, तो जाँच में बिल्कुल भी देर नहीं करनी चाहिए।
नोवा आई.वी.एफ फर्टिलिटी, वाराणसी में आधुनिक फर्टिलिटी टेक्नोलॉजी और विशेषज्ञ आई.वी.एफ लैबोरेटरी हैं, जो इन्फर्टिलिटी के जटिल से जटिल मामलों में भी व्यक्तिगत ट्रीटमेंट प्लान के साथ अपेक्षित परिणाम देने में समर्थ हैं।



