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इंदौर में जहरीले पानी से 15 मौतों पर बवाल, नगर आयुक्त और अतिरिक्त आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी

इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से शुक्रवार को एक और बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। वहीं इस मामले पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने इंदौर प्रशासन और नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस द्वारकाधीश बंसल और जस्टिस राजेंद्र कुमार वाणी की खंडपीठ ने साफ शब्दों में कहा कि यह एक बड़ी लापरवाही है और लोग पानी की वजह से मर रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है। हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए और दूषित पानी से बीमार हुए सभी लोगों को सर्वाेत्तम चिकित्सा सुविधा दी जाए।
इसी बीच जहरीले पानी को लेकर एमपी सरकार ने बड़ी कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर शुक्रवार को इस घटना के संबंध में इंदौर के नगर आयुक्त और अतिरिक्त आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। साथ ही अतिरिक्त आयुक्त को इंदौर से हटा दिया गया है और जल वितरण विभाग के प्रभारी अधीक्षण अभियंता को उनके पद से मुक्त कर दिया गया। दरअसल, इस मामले में 31 दिसंबर को दो जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं। शुक्रवार को इन आदेशों के पालन को लेकर स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई। साथ ही एक तीसरी जनहित याचिका पर भी सुनवाई हुई।

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