उत्तराखंडदेहरादून

भूमेश भारती की पुस्तक एरियल विस्टाज ऑफ उत्तराखंड पर दून पुस्तकालय में चर्चा

देहरादून: दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से आज सायं केन्द्र के सभागार में भूमेश भारती की एक नई चित्रात्मक पुस्तक / कॉफी टेबल बुक ‘एरियल विस्टाज ऑफ उत्तराखण्ड’ पर चर्चा का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें पुस्तक के रचनाकार के साथ हिमांशु आहूजा ने महत्वपूर्ण पक्षों पर चर्चा की.

भूमेश भारती की यह पुस्तक फोटोग्राफी के क्षेत्र में एक अनूठा अद्भुत प्रयास है। लगभग पंद्रह वर्षों की मेहनत से तैयार ये कॉफी टेबल बुक जमीन से हजारों फीट ऊपर जाकर हेलीकॉप्टर से उड़ते हुए अचूक और लाजवाब फोटोग्राफ्स खींचने का परिणाम है। यह संग्रह उत्तराखंड हिमालय को एक नवीन दृष्टि से देखने का मौका देता है, जो एक आम आदमी के लिए लगभग असंभव है। एरियल विस्ताज ऑफ उत्तराखंड में मध्य हिमालय की चोटियों के विलक्षण दृश्य एवं उसके विविध दृष्टिकोण , हजारों फीट की ऊंचाई से उत्तराखंड की नदियों, घाटियों, कस्बों, खासकर टिहरी झील और दून घाटी के अविस्मरणीय फोटोग्राफ्स हैं।

हिमांशु आहूजा के साथ चर्चा में भूमेश भारती ने विस्तार से अपनी एरियल फोटोग्राफी के अनुभव साझा किए तथा ड्रोन फोटोग्राफी व एरियल फोटोग्राफी के अंतर को भी रेखांकित किया।
भूमेश भारती ने अपनी फोटोग्राफी के चालीस सालों के सफर, उसमें आने वाली दिक्कतों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और अपने जुनून के बीच उनके छायाकार जीवन पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के दौरान भूमेश भारती ने विडियो और स्लाइड शो के माध्यम से हिमालय के हवाई दृश्यों पर शानदार प्रस्तुति भी दी. पुस्तकालय के लॉबी में हिमालयी दृश्यों के कुछ र्दुलभ चित्रों की प्रदर्शनी भी लगायी गयी. जिसका अनेक लोगों ने अवलोकन किया।

उल्लेखनीय है कि इस पुस्तक की एक सौ साठ तस्वीरें अधिकतम 28,000 फ़ीट से न्यूनतम 100 फ़ीट की ऊँचाई पर पचास से अधिक उड़ानों के माध्यम से जिनमें से प्रत्येक की औसत अवधि पंद्रह मिनट के मध्य थी, अथक मेहनत से खींची गई हैं।

देहरादून में जन्मे और पले-बढ़े, भूमेश भारती ने अपनी लगन और मेहनत से फोटोग्राफी में दक्षता हासिल की है। बच्चों की एक प्रतियोगिता में पुरस्कार स्वरूप कैमरा मिलने के बाद फोटोग्राफी का शौक आया और बाद में निखरता गया। हिंदी में पत्रकारिता में एक बेहतर कैमरे की ज़रूरत महसूस करते हुए उन्होनें . अपनी रिपोर्टिंग को बेबाक तस्वीरों के साथ पेश किया। 2010 में गढ़वाल मण्डल विकास निगम में कंप्यूटर तकनीशियन की नौकरी छोड़कर वे पूर्णकालिक फोटोग्राफर बन गए। चर्चा के बाद उपस्थित लोगों ने जबाब सवाल भी किये. कार्यक्रम का संचालन अमिता नवीन ने किया.

कार्यक्रम में सतपाल गाँधी, डॉ. बृज मोहन शर्मा,नादिर बिल्मोरिया, जय राज,अरुण कुमार असफल, हरिराज, जगदीश बाबला, विजय कुमार भट्ट, केंद्र के प्रोग्राम एसोसिएट चन्द्रशेखर तिवारी, कमलेश खंतवाल,कुलभूषण नैथानी, भारत सिंह रावत, सुंदर सिंह बिष्ट, कुसुम रावत, गौरी सिंह, जे एस खैरा,आलोक सरीन,ललित सिंह राणा जगदीश सिंह महर, डॉ. लालता प्रसाद सहित शहर के, प्रबुद्ध लोग, छायाकार, साहित्यकार, लेखक, पाठक और युवा पाठक उपस्थित रहे।

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